Ayush mishra
देखते ही देखते यह हिंदी गुजर गई
आज यह गणित की प्रतिस्पर्धा में छूट गई
आज हम अपनी संस्कृति को भूल गए
यूं ही हम अंग्रेजी में लुट गए
मैं भी इस गणित का ही मारा हूं
यूं ही अंग्रेजी का दीवाना हूं
आज अपनी ही संस्कृति अधूरी लगती है
यूं ही अंग्रेजों की भाषा प्यारी लगती है
यह नए जमाने के बच्चे हैं अंग्रेजी के ही सच्चे
मानो तो हिंदी में ही कच्चे हैं
मैं भी अपनी संस्कृति को भूलने निकला हूं
आज यह शिक्षक का बेटा चकित है
यूं ही अंग्रेजी के जमाने से भ्रमित है
हिंदी की बहारों में यूं ही अंग्रेजी की सजावट है
आज यह अंग्रेजी का ही स्तर यूं ही कहे तो हिंदी की बेवफाई का समंदर है
या कविता स्वयं आयुष मिश्रा द्वारा रचित है जो अंग्रेजी का मान बढ़ता हुआ दिखता है और आज अपनी ही हिंदी अधूरी लगने पर यह कविता लिखी गई है हिंदी दिवस पर इसे प्रयोग किया जा सकता है